हिंदी कविता

मैं किसकी औरत हूँ - सविता सिंह

मैं किसकी औरत हूँ - सविता सिंह  मैं किसकी औरत हूँ  मैं किसकी औरत हूँ कौन है मेरा परमेश्‍वर किसके पांव दबाती हूँ किसका द…

कविता सुनो ब्राह्मण - मलखान सिंह

कविता सुनो ब्राह्मण - मलखान सिंह सुनो ब्राह्मण, हमारे पसीने से बू आती है, तुम्हें। तुम, हमारे साथ आओ चमड़ा पकाएंगे दोनो…